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119 साल पुराने भूमि पंजीकरण कानून को विराम, अब डिजिटल नियम लागू

Land Registry Rule: नमस्ते दोस्तों! क्या आप भी कभी जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए तहसील या कचहरी के चक्कर काट-काटकर परेशान हुए हैं? अगर हाँ, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। भारत में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे 119 साल पुराने भूमि कानून (Registration Act, 1908) को अब बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जी हाँ, अब लंबी कतारों और फाइलों के ढेर का दौर खत्म होने वाला है क्योंकि डिजिटल भूमि पंजीकरण का नया युग शुरू हो चुका है।
आज के इस आर्टिकल में हम बिलकुल आसान भाषा में समझेंगे कि आखिर यह नया बदलाव क्या है, ऑनलाइन जमीन रजिस्ट्रेशन अब कैसे होगा और इससे आपको क्या फायदे होने वाले हैं। तो चलिए, इस डिजिटल क्रांति को विस्तार से जानते हैं।
क्यों बदला जा रहा है पुराना कानून?
दोस्तों, जो कानून 1908 में बना था, वह आज के डिजिटल दौर में फिट नहीं बैठ रहा था। पुराने सिस्टम में कागजों की हेराफेरी, डुप्लीकेट रजिस्ट्री और फर्जीवाड़े की गुंजाइश बहुत ज्यादा थी। इसी को रोकने के लिए सरकार ने नई भूमि पंजीकरण नियमावली को लागू करने का फैसला किया है। इसका मुख्य मकसद जमीन से जुड़े विवादों को खत्म करना और पूरे सिस्टम को पारदर्शी (Transparent) बनाना है।
अब कैसे होगा डिजिटल भूमि पंजीकरण? (Digital Process)
अब आपको अपनी संपत्ति का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए दलालों के पीछे भागने की जरुरत नहीं है। सरकार ने ई-पंजीकरण पोर्टल तैयार किए हैं, जहाँ आप घर बैठे प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यह प्रक्रिया कुछ इस तरह काम करेगी:
- ऑनलाइन आवेदन: सबसे पहले आपको संपत्ति रजिस्ट्रेशन डिजिटल पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा।
- दस्तावेज़ अपलोड: अपने सारे जरुरी भूमि दस्तावेज़ ऑनलाइन ही स्कैन करके अपलोड करने होंगे।
- आधार सत्यापन: सबसे ख़ास बात यह है कि अब आधार आधारित भूमि सत्यापन होगा, जिससे कोई भी दूसरा व्यक्ति आपकी जमीन अपने नाम नहीं करवा सकेगा।
- फीस का भुगतान: स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी अब ऑनलाइन ही जमा होगी।
भूमि रिकॉर्ड्स डिजिटलाइजेशन: “जमाबंदी” अब आपकी जेब में
आपको याद होगा कि पहले जमाबंदी ऑनलाइन देखने के लिए पटवारी के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। भूमि रिकॉर्ड्स डिजिटलाइजेशन के तहत देश के लगभग हर राज्य ने अपने लैंड रिकॉर्ड्स को ऑनलाइन कर दिया है।
अब आप अपने मोबाइल पर ही एक क्लिक में देख सकते हैं कि जमीन का असली मालिक कौन है। इससे जमीन खरीदते समय होने वाली धोखाधड़ी पूरी तरह बंद हो जाएगी। आप जमीन रिकॉर्ड ऑनलाइन चेक करके ही सौदा पक्का कर सकते हैं।
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ULPIN: जमीन का आधार कार्ड
इस नए सिस्टम में एक और क्रांतिकारी चीज जुड़ी है, जिसे ULPIN (Unique Land Parcel Identification Number) कहा जा रहा है। सरल भाषा में कहें तो यह आपकी जमीन का आधार कार्ड है। 14 अंकों का यह नंबर आपकी जमीन की सटीक लोकेशन (Coordinates) बताएगा। भविष्य में आपको मिलने वाला डिजिटल भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र इसी नंबर पर आधारित होगा।
आम आदमी को होने वाले 5 बड़े फायदे
यह नया डिजिटल नियम हम जैसे आम लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके फायदे देखिये:
- समय की बचत: अब महीनों का काम कुछ दिनों या घंटों में हो जाएगा।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: जब सारा काम ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के जरिए होगा, तो रिश्वत देने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी।
- सुरक्षा: आपके दस्तावेज़ डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रहेंगे, उनके फटने या खोने का डर नहीं होगा।
- कोर्ट-कचहरी से मुक्ति: साफ़-सुथरे रिकॉर्ड्स होने से जमीनी लड़ाइयां कम होंगी।
- कहीं से भी एक्सेस: आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर अपनी संपत्ति का स्टेटस चेक कर सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों, 119 साल पुराने भूमि कानून का अंत एक नई शुरुआत है। डिजिटल भूमि पंजीकरण न केवल हमारी व्यवस्था को सुधार रहा है, बल्कि यह हमारी मेहनत की कमाई (संपत्ति) को भी सुरक्षा दे रहा है। अगर आपने अभी तक अपनी जमीन के कागजात डिजिटल नहीं किये हैं, तो आज ही अपने राज्य के ई-पंजीकरण पोर्टल पर जाएं और चेक करें।
जागरूक बनें और डिजिटल इंडिया की इस मुहीम का हिस्सा बनें। अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो, तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना न भूलें!
Published On: November 25, 2025 9:09 AM by Chandrahas